JEEBH ( IN HINDI )



 जीभ  


शरीर में बिना हड्डी की  यह जीभ 
बहुत गुल खिलाती है ज़िंदगी में 
कभी कुछ कहती है तो कभी कुछ 

जीभ का रिश्ता केवल स्वाद से ही नहीँ 
दिल और दिमाग से  भी  जुड़ा है 

जब भी जीभ के शब्द सुनाई देते हैं 
 अपनी बात पूरी करते हैं    
 जीभ का रंग हमारी सेहत का हाल भी बताता है 
जब यह बोलती है बोलने वाले के व्यक्तित्व 
और सोच का आइना बन जाती है 

जब ये जीभ दुनिया के लिये  कुछ बोलती है 
तो इसने क्या कहा, किससे और कैसे कहा 
इसका असर दुनिया में दिखाई देता है 

मन में छिपी इज़्ज़त आदर सम्मान सब दिखाती है 
लेकिन फिर यही जीभ विनाशनी बन कर 
बहुत नुकसान पहुंचाती है 

प्यार मुहब्बत गुस्सा या क्रोध 
मन की भावनाएँ और अहसास सब नज़र आते हैं 
जीभ कभी रुकती नहीँ उसी क्षण बोलती है 
फिर चाहे व्यंग हो या बहस 

मुहँ से निकले हर शब्द का अपना सुर और अंदाज़ है 
धार्मिक ग्रंथ हों कविता या  गीत संगीत 
या साधारण बातचीत 

लगता है जैसे  जीभ में  शब्दों का समंदर हो 
सच्चे झूठे कड़वे और प्यार से मीठे शब्द सभी कुछ है इसमें   
अच्छा होता अगर थोड़ी सहनशक्ति भी होती 
बोलनें से पहले  जीभ थोड़ा सोचती भी  

जीभ से निकले शब्द  - अतीत की समझ हैं 
जीभ के कहे  शब्द - वर्तमान की सच्चाई हैं 
जीभ से निकले शब्द - भविष्य का वायदा भी हैं 



____________________
 




















Comments

  1. जीभ के द्वारा व्यक्त किए गये शब्द एक लेखनी के द्वारा लिखे गए शब्दों के समान ही काफी प्रभावशाली लगते हैं। प्रभाव कैसा होता है या होगा यह व्यक्त शब्दों के अंदाज़ और भाव पर अधिकतर निर्भर करता है जैसा कि अरूणा जी की उपरोक्त सशक्त कविता में दर्शित है।
    अति सुन्दर कविता ❤️

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