MAEN PURUSH NAHEEN BANNA CHAHTEE ( HINDI )

मैं पुरुष नहीँ बनना चाहती 


मैं नारी हूँ
सख़्त और कठोर नहीँ हो सकती  
मैं पुरुष नहीँ बनना  चाहती  

संसार की उत्पत्ति मेरी ही नियती है 
मेरी ही बाँहों में  है हर पीढ़ी का पालना 
परिवार और बच्चों को छोड़ कर जानें  की 
हिम्मत मुझमें नहीँ
मैँ कोई महापुरुष नहीँ हूँ 

बिना झिझक मैं दुनियाँ  और
 तकदीर से लड़ सकती हूँ    
अपनों की ख़ुशी के लिये 
 अपनी खुशीयों की बली भी  चढ़ा देती हूँ 

मैं कठोर नहीं 
जीवन के सभी रिश्ते पूरे मन से मानती हूँ  
और निभाती भी हूँ   
क्या पुरुष जीवन के सारे रिश्तों को
 पूरे  मन से स्वीकार करते हैं ?

इतिहास साक्षी है 
पुरुष ने सदा  निर्दयता से  
नारी को दंड दिया   है 
मानसिक भी और शारीरिक भी 

मैं पुरुष का अहंकार और गलती   
सब सह सकती हूँ 
लेकिन स्वीकार नहीँ  कर  सकती 

सारे संसार की जननी हूँ  मैं 
अनंत प्यार का शिखर हूँ 
त्याग की चरम  सीमा हूँ 
धैर्य और सहनशीलता मेरी प्रकृती है
मैं हूँ माँ
 
बेटी,  बहन, पत्नी
  स्त्री के हर रूप में 
सृष्टी की सुंदरता का संतुलन हूँ 
मैं पुरुष की तरह कठोर नहीँ 

मुझमें पुरुष बनने की चाह ही  नहीं 
मैं  हूँ  नारी  
संसार में ईश्वर की सबसे  सशक्त रचना  
परमात्मा का दूसरा हाथ  



____________

 

















Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

THE MOTHER

PYAR KI DHUN (HINDI)

THE MOTHERS

AS GOOD AS ONION

THE SIGNATURE OF TIME

THE BABY BED OF HUMANITY

NOOR KI BOOND (IN HINDI)

MAEN OR MERI KHUSHIYAN (HINDI )

ZINDAGI KEE LKEERAEN ( HINDI )

THE FRUIT OF LOVE