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THE DIGNITY

                                                            THE DIGNITY                                                                          A jewel of the soul                                     Virtue of a person                                     Dignity is a blessing                                     Promised by our thoughtful behavior            ...

THE SUNSHINE

                                                               THE SUNSHINE                           Imagine a sunless world                           Without colors, without flowers                           Making world dark and gloomy                            You are born to be happy and free                            Joy is your birthright                            Wallowing in sadness multiplies unhappiness     ...

MERI PHULKARI ( IN PUNJABI)

मेरी    फुलकारी   इक सोहणी  जई तस्वीर बणदी  ऐ जद छोटियाँ छोटियाँ गल्लां ते निक्के निक्के पल  साडी  ज़िंदगी च ओंदे  ने    दिल दियाँ सोचां ते दिल दियाँ इच्छावां      साडी ज़िंदगी दे मोती हण   हर मोती दी अपणी चम्क ऐ  छोटीयां ख़ुशियाँ कदी छोटी नई हुन्दियां  ऐना दियाँ यादां कदी भूलाए नई  भुल्दियाँ  साडी ज़िंदगी दी कोई वी शै छोटी नई  बस ऐ ईओ ज़िंदगी  ऐ   हर पल अनमोल है कदी मुड़ के नई औंदा     जिवें नैहर दा ओईओ  पाणी  दुबारा साडे हथ नई लगदा  सूर्ज तां रोज़ सवेरे सारी दुनियाँ दा जन्मदिन लैके औंदा  ऐ  सारे रलमिल हँस के हर दिन रज्ज के मनाओ   दिल विच प्यार होवे तां खुशी वी मिलदी ऐ  प्यार नू घुट्ट के जफ्फी पा लओ  ते फ़ेर देखो खुशियाँ दियां रौनकां   ते खुशियाँ दे  मेले  प्यार दे बोलाँ नाल   दिल दे बाग़ विच ख़ुश्बू भऱ जांदी ऐ...

PYARI BETIYAN (HINDI)

                                                                       प्यारी  बेटियां  हर घर का सिंगार बेटियां   हँसती खेलती प्यारी बेटियाँ  एक ही  कोख से जन्मे बेटे और बेटियाँ  बेटों ने बनाई अपनी दुनिया  गुड्डे गुड़िया संग घर घर बनाती  छुप्पन छुपाई खेलतीं बेटियाँ  बेटियााँ  ही बनती हैं  बहन  और बनतीं हैं पत्नी  बेटियां ही बनतीं हैं माँ  उसी कोख से जन्म लेते   बेटे और बेटियाँ  ये  कभी पराया धन नहीं होतीं  परिवार पर कुर्बान करतीं हैं अपने आपको  माँ बाप की माँ भी बन जातीं है ये बेटियाँ  ये प्रकृति का नियम भी चलाती हैं   हर पीढ़ी पालतीं हैं माँ बन कर   संसार में प्यार बाँटतीं हैं  ईश्वर का दूसरा हाथ हैं बेटियाँ  हर घर का सिंगार  ये नन्हीं नन्हीं प्यारी...

MUSIC OF TIME AND WOMEN

MUSIC OF TIME AND WOMEN No generation can ever see future  Without mother Her arms are the cradle of humanity Symbol of unconditional love Mother the heart of humanity Lust drives men to do great things But not all of them necessarily  Decent and honorable Innocence is snatched and stripped Generations of  women screaming, crying softly Due to the fear of loosing respect Women are peeling off the personal shadows All are born with wings Now learning to fly Finding their personal strengths Locked in within Emerging from shell World is listening their footsteps Entering varied avenues of art, science  Commerce and fields of all kinds Reaching the peaks of success Making their own mark Women making homes and And in every other field of the world Writing history   Women are moving with  The music of time Creating ripples of motivation Their achievements speak of their existence Hear the sounds of their footsteps  Women are enforcing change Let the world be...

BULBULA ( IN HINDI)

बुलबुला न जाने कहाँ से आया  जाने कहाँ ले जाये कुछ पता नहीं ये अल्हड़  सी ज़िन्दगी  पानी का बुलबुला गुड्डे गुड़िया के संसार और माँ बाप के प्यार में  खेलता रहा दौड़ता रहा  जहाँ  जी चाहा  न जाने बचपन  कैसे हवा में उड़ गया  पता ही नहीं चला जवानी की धूप  अपने अंदर समंदर समेटे  कभी टेढ़ी मेढ़ी पगडंडियों में  और कभी ऊंची नीची वादियों और घाटियों में बुलबुला भँवरे की तरह सपनों के पंख लगा  ज़िंदगी के फूलों  और काँटों से गुज़रता रहा  दिल की उमंगों,  इरादों की हिम्मत  और हौसलों का आँचल पकड़े  कभी ऊपर तो कभी नीचे ये बुलबुला   समय की लहरों पर डोलता रहा झूलता रहा  और अचानक  फिर एक दिन अपनी उमंगों के  इँद्रधनुष के सभी  सतरँगी  रंग लिये  अपने ही समंदर में खो जाता है     ये अल्हड़ सा बुलबुला   नन्हाँ सा, प्यारा सा   मन का  चुलबुला बुलबुला जाने कहाँ कहाँ ले जाए कुछ पता नहीं  इस  प्यारी ज़िंदगी को ...

DRPAN (HINDI)

दर्पण   कितना जानते  हो अपने आपको क्या दिल के आइने में कभी खुद को देखा है     योग और एकांत में क्या अपना सच दिखाई देता है  कितना पहचानते हो स्वयं को  अगर सभी लोग दर्पण पहन लें   वो खुद को ही देखेंगे,  दूसरों को नहीं   कोई भी अहम या अहंकार इतना बड़ा न हो जाए  कि वहम ही बन जाए  इच्छाऐं , अपेक्षाऐं  रिश्तों और भावनाओं को जन्म देती हैं  अहंकार और ईर्षा  केवल उदासी और अकेलापन पैदा करते  है मानव शरीर का कोई भी अंग  स्वतंत्र काम नहीं करता  जीवन के सभी पहलू  पारिवारिक,  सामाजिक और  राष्ट्रीय  हमेशा एक दूसरे से ही जुड़े रहते  हैं  कभी खुद से मिलना हो  तो  अपने रिश्तों के बारे में सोचें  सभी रिश्तों में केवल अपनी ही झलक मिलती है  हर रिश्ता कुछ कहता है    इन्हीं रिश्तों के सहारे हर ज़िंदगी चलती है     स्नेह और सम्मान में छिपा है    संसार के सुखी जीवन का आ...